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आरती · Aarti

आरती गुरुवर की

थाली घुमाकर आरती उतारें — move the thali around the photograph

परम पूज्य आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी मुनिराज

पाए विद्यानंद गुरुवर के शिष्य कहा,
आचार्य पद पर नाम वसुनंदी पाए!
भक्त कहें गुरुवर प्राण हमारे,
आरती गुरुवर की उतारो मिलके सारे!

सूरज जिनका, जिनकी हैं चांद-तारे,
आरती गुरुवर की उतारो मिलके सारे!

गुरुवर सब शिष्यों के मध्य ऐसे लागें,
तारों बीच जैसे शीतल चंद्रमा विराजें।
लेकर रूप वीरा का धरा पे अवतारी,
आरती गुरुवर की उतारो मिलके सारी!

अश्विन कृष्ण अमावस्या को धरती पे आए,
ऋषभ त्रिवेणी संग सब हर्षाए।
दूर हुए तब ही धरा से अंधियारी,
आरती गुरुवर की उतारो मिलके सारे!

तप से तपाई देह कुंदन बनाई,
भक्तों में ज्ञान की ज्योति जलाई।
धरती खड़ी, अंबर खड़ा जिनके सहारे,
आरती गुरुवर की उतारो मिलके सारे!