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साहित्य

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55 ग्रंथ

अमरसेन चरित्र (कविवर माणिक्कराज जी)

अमरसेन चरित्र (कविवर माणिक्कराज जी)

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कविवर माणिक्कराज जी द्वारा रचित प्रस्तुत ग्रंथ "अमरसेन चरित्र" प्रथमानुयोग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। अमरसेनके साथ साथ वइरसेन का जीवन चरित्र सार रूप से वर्णित किया है। प्रस्तुत कृति में 7 संधियों में 114 कवड़क और 1741 यमक पदों के द्वारा रुचिकर अपभ्रंश भाषा में अनुपम रचना की है।

आराधना कथा कोष (ब्र. श्री नेमिदत्त जी) (भाग 1-2-3)

आराधना कथा कोष (ब्र. श्री नेमिदत्त जी) (भाग 1-2-3)

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करकण्डु चरित्र (मुनि श्री कनकामर जी)

करकण्डु चरित्र (मुनि श्री कनकामर जी)

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प्रस्तुत ग्रंथ "करकण्डु चरित्र" कर्म व भावों के फल को राजा करकण्डु के माध्यम से प्रस्तुत करता है। इस ग्रंथ में पूर्व भव में किए पाप और पुण्य के फल का चित्र देख सकते हैं। इस ग्रंथ की रचना मुनि श्री कनकामर जी द्वारा संभवत: ईस्वी सन् 965 के पूर्व में हो चुकी थी।

कोटिभट श्रीपाल चरित्र (आ. श्री सकलकीर्ति जी)

कोटिभट श्रीपाल चरित्र (आ. श्री सकलकीर्ति जी)

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क्षत्र-चूड़ामणि (जीवंधर चरित्र)

क्षत्र-चूड़ामणि (जीवंधर चरित्र)

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आचार्य श्री वादीभसिंह सूरि जी द्वारा रचित प्रस्तुत ग्रंथ "क्षत्र चूड़ामणि" में णमोकार मंत्र की महिमा को जीवन्धर कुमार के माध्यम से दर्शाया है। जीवन्धर कुमार ने कुत्ते को णमोकार मंत्र सुनाया जिससे वह स्वर्ग में देव हुआ। प्रस्तुत ग्रंथ मनोहारी, सुपाठ्य, गीयमान, अनेक नीति-रीति, कहावतों, मुहावरों, लोकोक्तियों और दृष्टांतों से परिपूरित है। इस ग्रंथ की प्रमुख विशेषता यह है कि इसमे श्रृंगार रस का बाहुल्य और अलंकारों का अतिरेक नहीं है। यह ग्रंथ संक्षिप्त, सारगर्भित, सुगम, बोध गम्य एवं लुभाने वाला है।

गौतम स्वामी चारित्र (मण्डलाचार्य श्री धर्मचंद्र जी)

गौतम स्वामी चारित्र (मण्डलाचार्य श्री धर्मचंद्र जी)

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मंडलाचार्य श्री धर्मचंद्र स्वामी जी द्वारा रचित प्रस्तुत ग्रंथ "गौतम स्वामी चरित्र" भगवान महावीर स्वामी के मुख्य गणधर गौतम स्वामी के जीवन चरित्र पर आधारित है, जो उनके भूत-भविष्यत्-वर्तमान भवों को दर्शाता है। इसमे स्वर्ग, नरक और मध्यलोक की स्थिति, देव, तिर्यंच और मनुष्यों की उत्कृष्ट स्थिति आदि का वर्णन श्रेष्ठतम रीति से किया गया है। इस ग्रंथ के स्वाध्याय से पाप भीरूता, सम्यक्त्व और चारित्र में दृढ़ता तथा निर्मलता आती है। यह महानता के संस्कारों का बीजरोपण करने का सर्वोत्तम उपाय है।

चंद्रप्रभ चरित्र

चंद्रप्रभ चरित्र

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चारूदत्त चरित्र (ब्र. श्री नेमिदत्त जी)

चारूदत्त चरित्र (ब्र. श्री नेमिदत्त जी)

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ब्रह्मचारी नेमीदत्त द्वारा रचित प्रस्तुत ग्रंथ चारुदत्त चरित्र सरल हिंदी में रचित है जिसमें चारुदत्त नामक पात्र के उत्तम जीवन पर प्रकाश डाला है। मुख्य घटना इसमें चारुदत्त द्वारा बकरे को णमोकार मंत्र सुनाए जाने की है तथा इन दोनों की भूत-भविष्यत्-वर्तमान जीवन का वर्णन किया गया है। इस ग्रंथ के माध्यम से अंतरंग में विद्यमान मिथ्यात्वादि अंधकार तिरोहित हो जाता है, जीवन में समता का भाव, संतोष वृत्ति एवं दुर्व्यसनों से मुक्त होने की अपूर्व ही प्रेरणा प्राप्त होती है।

चित्रसेन पद्मावती चरित्र (पं. पूर्णमल्ल जी)

चित्रसेन पद्मावती चरित्र (पं. पूर्णमल्ल जी)

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प्रस्तुत ग्रंथ में भगवान महावीर स्वामी के समय में हुए चित्रसेन और पद्मावती के शील व्रत का वर्णन किया गया है। पंडित पूर्णमल्ल जी द्वारा ग्रंथ का सरल भाषा में कथन करते हुए रचना की गई है। इस पौराणिक कथा में आहार दान की अनुमोदना करने मात्र से ही हंस युगल चित्रसेन और पद्मावती हुए।

चेलना चारित्र

चेलना चारित्र

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चौबीसी पुराण

चौबीसी पुराण

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इस काल में हुए चौबीस तीर्थंकरों के जीवन चरित्र का कथन करने वाला ये चौबीसी पुराण आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा सम्पादित है; जो बहुत रोचक है।

जिनदत्त चरित्र (कविवर ब्रह्मराय)

जिनदत्त चरित्र (कविवर ब्रह्मराय)

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श्री गुणभद्राचार्य जी द्वारा रचित "जिनदत्त चरित्र" नामक यह ग्रंथ अरिहंत मत का अवलंबन लेने वाले जिनदत्त स्वामी के चरित्र का वर्णन करने वाला श्रेष्ठ ग्रंथ है, जो भव्य जीवन को मोक्षमार्ग की प्रेरणा देने वाला, संसार- शरीर-भोगों के यथार्थ स्वरूप का दिग्दर्शन कराने वाला है।

त्रिवेणी (संग्रह ग्रंथ)

त्रिवेणी (संग्रह ग्रंथ)

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देशभूषण कुलभूषण चरित्र

देशभूषण कुलभूषण चरित्र

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धन्यकुमार चरित्र (आ. श्री सकलकीर्ति जी)

धन्यकुमार चरित्र (आ. श्री सकलकीर्ति जी)

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प्रस्तुत ग्रंथ "धन्य कुमार चरित्र" की रचना आचार्य श्री सकलकीर्ति जी द्वारा समस्त वर्ग को ध्यान में रखते हुए की गई है जिसमें सरल, सहज, हृदयाग्राह्य व सुगम शब्दों का उपयोग करते हुए चरित्रनायक धन्यकुमार के भवों का वर्णन किया है। आहारदान की अनुमोदना करने मात्र से तथा पंच नमस्कार मंत्र और अणुव्रतों को ग्रहण कर अकृतपुण्य स्वर्गाधिकारी हो धन्यकुमार सेठ हुआ।

धर्मामृत (भाग 1-2) (श्री नयसेनाचार्य जी)

धर्मामृत (भाग 1-2) (श्री नयसेनाचार्य जी)

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नंगानंग कुमार चरित्र (श्रीमान् देवदत्त)

नंगानंग कुमार चरित्र (श्रीमान् देवदत्त)

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प्रस्तुत ग्रंथ "नंग अनंग कुमार चरित्र" करोड़ों मुनिराजों की साधना एवं सिद्धत्व से पुनीत स्वर्णगिरि/श्रमणगिरि/सोनागिर से मोक्ष पधारे दो भाई नंग और अनंग कुमार के जीवन पर रचित है। इस छोटे से ग्रंथ में भी कविवर ने गागर में सागर की तरह धर्म का मर्म भर दिया है। यह ग्रंथ 16 अध्याय एवं 1114 श्लोकों द्वारा रचकर मार्गशीर्ष सुदी 4, वि.सं. 1845 में पूर्ण हुआ।

नागकुमार चरित्र (आ. श्री मल्लिषेण जी)

नागकुमार चरित्र (आ. श्री मल्लिषेण जी)

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आचार्य श्री मल्लिषेण जी द्वारा रचित प्रस्तुत ग्रंथ "नाग कुमार चरित्र" अत्यंत प्रेरणादायी, वैराग्य प्रद एवं आनंददायक है। ये मगध देश के राजकुमार श्री नागकुमार के जीवन चरित्र पर आधारित है जिनकी कुल आयु 1000 वर्ष थी। इस ग्रंथ में अत्यंत सरल व रोचक रूप से पाप-पुण्य का विवेचन सबके हित की भावना से किया गया है।

पाण्डव पुराण (श्रीमदाचार्य शुभचंद्र देव)

पाण्डव पुराण (श्रीमदाचार्य शुभचंद्र देव)

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पार्श्वनाथ पुराण (आ. श्री सकलकीर्ति जी)

पार्श्वनाथ पुराण (आ. श्री सकलकीर्ति जी)

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पुण्यास्रव कथा कोश भाग-1

पुण्यास्रव कथा कोश भाग-1

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श्री रामचंद्र मुमुक्षु द्वारा रचित "पुण्यास्रव कथा कोश भाग -1" ग्रंथ अत्यंत सरल भाषा में रचा गया है जिसमें 6 अधिकारों के माध्यम से पुण्यास्रव के 6 कारणों का ही वर्णन है। 1. जिनेन्द्र पूजन 2. णमोकार महात्म्य 3. स्वाध्याय का फल 4. शीलव्रत का फल 5. उपवास का फल 6. दान का फल - इनकी 57 कथाएं लिपिबद्ध हैं। प्रारंभिक स्वाध्यायार्थी के लिए इस ग्रंथ का मात्र हिंदी अनुवाद ही 2 भागों में प्रकाशित किया गया है।

पुण्यास्रव कथा कोश भाग-2

पुण्यास्रव कथा कोश भाग-2

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श्री रामचंद्र मुमुक्षु द्वारा रचित "पुण्यास्रव कथा कोश भाग-2" ग्रंथ अत्यंत सरल भाषा में रचा गया है जिसमें 6 अधिकारों के माध्यम से पुण्यास्रव के 6 कारणों का ही वर्णन है। 1. जिनेन्द्र पूजन 2. णमोकार महात्म्य 3. स्वाध्याय का फल 4. शीलव्रत का फल 5. उपवास का फल 6. दान का फल - इनकी 57 कथाएं लिपिबद्ध हैं। प्रारंभिक स्वाध्यायार्थी के लिए इस ग्रंथ का मात्र हिंदी अनुवाद ही 2 भागों में प्रकाशित किया गया है।

पुण्यास्रव कथा कोष (भाग 1-2) (श्री रामचंद्र मुमुक्षु)

पुण्यास्रव कथा कोष (भाग 1-2) (श्री रामचंद्र मुमुक्षु)

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पुराण सार संग्रह (भाग 1-2) (आ. श्री दामनंदी जी)

पुराण सार संग्रह (भाग 1-2) (आ. श्री दामनंदी जी)

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आचार्य दामनंदि जी द्वारा रचित प्रस्तुत कृति "पुराण सार संग्रह" अनुपम पठनीय, मननीय, श्रव्य, श्राद्धय, ध्यातव्य व अनुकरणीय है। जो व्यक्ति आदि पुराण, हरिवंश पुराण, पद्म पुराण आदि दीर्घ काय ग्रंथ को देखकर पढ़ने से घबराते हैं, उन महानुभावों के लिए ये कृति अत्यंत उपयोगी है।