6 ग्रंथ
ज्ञानांकुश (तत्त्वचिंतन के सूत्र)
आचार्य भगवन "योगिन्द्र देव" द्वारा रचित ज्ञानंकुश (तत्व चिंतन के सूत्र) नामक इस ग्रंथ में परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी, प्राकृत भाषा चक्रवर्ती आचार्य श्री "वसुनंदी जी" मुनिराज ने शब्दों की सरलता व भाव गाम्भीर्य पूर्वक जो प्रवचन दिए; यह ग्रंथ उन्हीं का संकलन है। ध्यान के विषय में समझने के इच्छुक पाठकों के लिए यह ग्रंथ अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।
बोधि वृक्ष (प्रश्नोत्तर रत्नमालिका)
प्रस्तुत कृति 'बोधि वृक्ष' अजमेर चातुर्मास 2014 में आचार्य गुरुवर श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा आचार्य भगवन् श्री अमोघवर्ष स्वामी जी द्वारा रचित प्रश्नोत्तर रत्नमालिका पर की गई प्रवचनों की माला है। 21 दिनों की वाचना का प्रस्तुतिकरण इस कृति में किया गया है। अल्पकाय ग्रंथ को प्रवचनों के माध्यम से अल्पमति वालों के लिए भी बहुपयोगी और सरल बना दिया है, जिससे आबाल वृद्ध सभी स्वाध्याय कर सकते हैं।
मुक्ति का वाग्दान (इष्टोपदेश)
रत्नकरण्ड श्रावकाचार (श्रावकधर्म-संहिता)
शिवपथ का रथ (सामायिक पाठ)
प्रस्तुत कृति "शिवपथ का रथ" में 10 वीं शताब्दी के परम पूज्य आचार्य श्री अमितगति स्वामी द्वारा विरचित द्वात्रिंशतिका अपरनाम सामयिक पाठ के संस्कृत के 32 उपजाति छंदों पर आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज द्वारा जयपुर चातुर्मास में की गई मार्मिक वाचना को विधिवत् लिपिबद्ध किया गया है। लगभग 36 प्रवचनों में समय का संपूर्ण सार समाहित कर दिया गया है।
स्वात्मोपलब्धि (समाधि तंत्र)
प्रस्तुत ग्रंथ "स्वात्मोपलब्धि" आचार्य भगवन् श्री पूज्यपाद स्वामी द्वारा रचित समाधितंत्र पर परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य गुरुवर श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा 2017 में ग्रीन पार्क दिल्ली में चातुर्मास के दौरान ली गई अनुपम वाचना है। इसमें अध्यात्म रस का प्रवाह करने वाले 105 श्लोक हैं। शुद्धात्मा के स्वरूप का प्रतिपादन करने वाला यह चिंतन की विधि का अनूठा ग्रंथ है। आध्यात्मिकता क्या है? अध्यात्म विज्ञान, भेद विज्ञान क्या है? वह कैसे प्राप्त हो? इत्यादि को समझने के लिए हमारी दृष्टि में यह सर्वोत्कृष्ट ग्रंथ है।
