णमो अरिहंताणं · णमो सिद्धाणं · णमो आइरियाणं · णमो उवज्झायाणं · णमो लोए सव्वसाहूणं
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साहित्य

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34 ग्रंथ

अच्छी बातें (भाग 1, 2, 3)

अच्छी बातें (भाग 1, 2, 3)

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अन्तर्यात्रा

अन्तर्यात्रा

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आ जाओ प्रकृति की गोद में

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आज का निर्णय

आज का निर्णय

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प्रस्तुत पुस्तक "आज का निर्णय" गुरु मुख से निःसृत सद् विचारों का पुंज है। इसमें 268 सूक्तियां दी गई हैं। परम पूज्य आचार्य श्री वसुनन्दी जी मुनिराज अमृतमयी सुभाषित रूपी रत्नपिटारा प्रस्तुत कर रहे हैं। ये वर्तमान जीवन को सुखद और सफल बनाने के लिए आचार्य श्री द्वारा दिया गया निर्णय है ,जिस पर अमल करके हृदय को कषायों की कीचड़ से अमल (मल रहित) करके जीवन में सुख शांति आती है।

आधुनिक समस्याएँ प्रामाणिक समाधान

आधुनिक समस्याएँ प्रामाणिक समाधान

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आहारदान

आहारदान

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परम पूज्य आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा रचित प्रस्तुत कृति "आहार दान" के माध्यम से दिगंबर संतों की आहार चर्या में श्रावक द्वारा विवेक, मर्यादा, गुणवत्ता को ध्यान रखने हेतु प्रकाश डाला है। आहार दान की विधि क्या है, उसका फल आदि की संपूर्ण जानकारी भी इस पुस्तक से पाठकों को आसानी से सुलभ हो सकती है। पुस्तक के अंत में त्यागी-व्रतियों द्वारा ग्रहण करने योग्य औषधियों, भक्ष्य पदार्थों की मर्यादा, सूतक- पातक की विधि आदि का उल्लेख भी इसमे प्राप्त होता है।

एक हजार आठ

एक हजार आठ

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आचार्य गुरुवर श्री वसुनन्दी जी मुनिराज द्वारा रचित प्रस्तुत कृति "एक हज़ार आठ" सद्वाक्यों का पुष्प पुंज है जिसके अध्ययन से चित्त में रत्नत्रय का दिव्य प्रकाश स्वतः ही प्रसारित होता है। छोटे-छोटे सूत्र बड़े-बड़े दुर्गम मार्ग से निकलने के लिए दिशा सूचक यंत्र के समान हैं। भव्य जीवन के लिए ये सूत्र वाक्य या सुभाषित प्रवचन आदि वक्तव्यों में उपयोग होने पर उन्हे प्रभावशाली बनाएंगे।

कलम पट्टी बुद्धिका

कलम पट्टी बुद्धिका

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प्रस्तुत कृति "कलम पट्टी बुद्धिका" में पूज्य आचार्य श्री वसुनन्दी जी मुनिराज ने अल्प ज्ञानियों एवं बच्चों को ध्यान में रखते हुए सरल और सुगम प्रश्नों के माध्यम से जिनशासन का सार एकत्रित कर रचा है। बालकों के जीवन को सुखद और शांति पूर्ण बनाने के लिए माता के समान इस कृति को आंका जा सकता है। ये पुस्तक व्यक्ति और सृष्टि के चरम और परम विकास में सुसमर्थ कारण आध्यात्मिक विद्या के निमित्त भूत है।

गागर में सागर

गागर में सागर

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गुरु कृपा

गुरु कृपा

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प्रस्तुत पुस्तक "गुरु कृपा" में वर्ष के 365 दिनों के लिए गुरु की कृपा स्वरूप पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के वचन प्रदान किए गए हैं। इस पुस्तक में 11 अक्टूबर 2009 से 10 अक्टूबर 2010 तक के प्रत्येक दिवस का एक सद्विचार देने का प्रयास किया है। यदि पाठक वृन्द स्वीकार करें तो उनके जीवन की दिशा और दशा ही परिवर्तित हो सकती है।

गुरुवर तेरा साथ

गुरुवर तेरा साथ

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आचार्य भगवन् श्री वसुनन्दी जी मुनिराज द्वारा रचित प्रस्तुत कृति "गुरुवर तेरा साथ" में छोटे-छोटे 365 सूत्र हैं जिसमें से प्रत्येक दिन एक-एक सूत्र अपने हित के लिए चिंतन में ला सकते हैं। ये ऐसे सूत्र हैं जिन्हे पानी की तरह पीना नहीं मिश्री की तरह चबाना जरूरी है। यह ऐसी पगडंडियाँ हैं जो हमें सिद्धालय तक पहुंचाने वाली हैं।

जिन सिद्धांत महोदधि

जिन सिद्धांत महोदधि

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डॉक्टरों से मुक्ति

डॉक्टरों से मुक्ति

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दान के अचिन्त्य प्रभाव

दान के अचिन्त्य प्रभाव

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प्रस्तुत ग्रंथ "दान का अचिन्त्य प्रभाव" में 4 प्रकार के दानों के प्रभाव, फल और अवसर का विशेष रूप से वर्णन करते हुए विभिन्न कहानियां एवं उदाहरणों के माध्यम से दान का महत्व बतलाया गया है। दाता अपने मुख्य कर्तव्यों को जाने, समझे, प्रवृत्ति करे इस हेतु यहां दान के प्रभाव दर्शाने वाली कहानियों से युक्त कृति का सृजन किया है। भव्य जीव इसके माध्यम से अपने आहार आदि दान के कर्तव्यों में विशेष प्रवृत्ति करेंगे, यही इस कृति का उद्देश्य है।

धर्म बोध संस्कार (भाग 1-4)

धर्म बोध संस्कार (भाग 1-4)

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आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा रचित प्रस्तुत ग्रंथ 'धर्म बोध संस्कार' एक लघु काय ग्रंथ है किंतु धर्म के स्वरूप, सम्यग्ज्ञान/तत्वज्ञान और धार्मिक संस्कार का कोष है। जो भी पाठक इसका स्वाध्याय-अध्ययन, पठन-पाठन और मनन- चिंतन करेंगे वे निश्चय ही सन्मार्ग को प्राप्त कर आत्मा की निधि को प्राप्त करेंगे। जैन धर्म का परिचायक ज्ञान कराने की भावना से क्रम-क्रम से सीढ़ी चढ़ते हुए कुल 4 भागों में इसे विभक्त किया गया है जिससे स्वाध्यायार्थी अपनी योग्यता और जिज्ञासा के अनुसार अध्ययन का लाभ ले सकें।

धर्म संस्कार (भाग 1-2)

धर्म संस्कार (भाग 1-2)

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बच्चों और युवाओं के लिए धर्म का प्रारंभिक व मूलभूत ज्ञान कराने के लिए प्रश्नोत्तर के रूप में ये किताब आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा लिखी गई है। पुस्तक में 10 अध्याय इस प्रकार हैं:- 1. णमोकार मंत्र 2. अरिहंत परमेष्ठी 3. सिद्ध परमेष्ठी 4. आचार्य परमेष्ठी 5. उपाध्याय परमेष्ठी 6. साधु परमेष्ठी 7. मंगलोत्तम शरण 8. तीर्थंकर 9. जिनेंद्र देव दर्शन विधि 10. जैन श्रावक नोट- प्रत्येक अध्याय में 50 प्रश्न-उत्तर हैं।

निज अवलोकन

निज अवलोकन

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बहुत अच्छी बातें (भाग 1, 2, 3)

बहुत अच्छी बातें (भाग 1, 2, 3)

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मीठे प्रवचन (भाग 1-9)

मीठे प्रवचन (भाग 1-9)

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प्रस्तुत कृति "मीठे प्रवचन भाग-1" में सरल और मधुर, सटीक उदाहरणों और नई सोच से युक्त प्रवचनांश हैं जिन्हें पढने से न केवल धार्मिक ज्ञानार्जन होता है अपितु सामाजिक ज्ञान भी वृद्धिंगत होता है। यह जैन-जैनेतर समाज के लिए बहुपयोगी कृति है। इसमें लिखे मीठे प्रवचनों के अंश मानव को धर्म की प्रेरणा देने वाले हैं। इसके 6 भाग उपलब्ध हैं।

मीठे प्रवचन भाग-2

मीठे प्रवचन भाग-2

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प्रस्तुत कृति "मीठे प्रवचन भाग-2" में सरल और मधुर, सटीक उदाहरणों और नई सोच से युक्त प्रवचनांश हैं जिन्हें पढने से न केवल धार्मिक ज्ञानार्जन होता है अपितु सामाजिक ज्ञान भी वृद्धिंगत होता है। यह जैन-जैनेतर समाज के लिए बहुपयोगी कृति है। इसमें लिखे मीठे प्रवचनों के अंश मानव को धर्म की प्रेरणा देने वाले हैं। इसके 6 भाग उपलब्ध हैं।

मीठे प्रवचन भाग-3

मीठे प्रवचन भाग-3

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प्रस्तुत कृति "मीठे प्रवचन भाग-3" में सरल और मधुर, सटीक उदाहरणों और नई सोच से युक्त प्रवचनांश हैं जिन्हें पढने से न केवल धार्मिक ज्ञानार्जन होता है अपितु सामाजिक ज्ञान भी वृद्धिंगत होता है। यह जैन-जैनेतर समाज के लिए बहुपयोगी कृति है। इसमें लिखे मीठे प्रवचनों के अंश मानव को धर्म की प्रेरणा देने वाले हैं। इसके 6 भाग उपलब्ध हैं।

मीठे प्रवचन भाग-4

मीठे प्रवचन भाग-4

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प्रस्तुत कृति "मीठे प्रवचन भाग-4" में सरल और मधुर, सटीक उदाहरणों और नई सोच से युक्त प्रवचनांश हैं जिन्हें पढने से न केवल धार्मिक ज्ञानार्जन होता है अपितु सामाजिक ज्ञान भी वृद्धिंगत होता है। यह जैन-जैनेतर समाज के लिए बहुपयोगी कृति है। इसमें लिखे मीठे प्रवचनों के अंश मानव को धर्म की प्रेरणा देने वाले हैं। इसके 6 भाग उपलब्ध हैं।

मीठे प्रवचन भाग-5

मीठे प्रवचन भाग-5

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प्रस्तुत कृति "मीठे प्रवचन भाग-5" में सरल और मधुर, सटीक उदाहरणों और नई सोच से युक्त प्रवचनांश हैं जिन्हें पढने से न केवल धार्मिक ज्ञानार्जन होता है अपितु सामाजिक ज्ञान भी वृद्धिंगत होता है। यह जैन-जैनेतर समाज के लिए बहुपयोगी कृति है। इसमें लिखे मीठे प्रवचनों के अंश मानव को धर्म की प्रेरणा देने वाले हैं। इसके 6 भाग उपलब्ध हैं।

मीठे प्रवचन भाग-6

मीठे प्रवचन भाग-6

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प्रस्तुत कृति "मीठे प्रवचन भाग-6" में सरल और मधुर, सटीक उदाहरणों और नई सोच से युक्त प्रवचनांश हैं जिन्हें पढने से न केवल धार्मिक ज्ञानार्जन होता है अपितु सामाजिक ज्ञान भी वृद्धिंगत होता है। यह जैन-जैनेतर समाज के लिए बहुपयोगी कृति है। इसमें लिखे मीठे प्रवचनों के अंश मानव को धर्म की प्रेरणा देने वाले हैं।