34 ग्रंथ
रोहिणी व्रत कथा
वसु विचार
वसुनन्दी उवाच
संस्कारादित्य
सद्गुरु की सीख
प्रस्तुत कृति "सद्गुरु की सीख" में जन-जन को आह्लादित व नैतिक संस्कार प्रदान करने वाली आबाल वृद्ध सभी को प्ररेणा प्रदान करने वाली कहानियां हैं। संस्कृति और सभ्यता के संरक्षण और संवर्द्धन में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। कृति को आकर्षक बनाने के लिए चित्रों का सहारा भी लिया है, साथ ही सरल, सहज शब्दों के प्रयोग के कारण यह सभी वर्ग के लिए उपयोगी कृति है। शिक्षाप्रद कथाएं अवश्य पठनीय होती हैं।
सफलता के सूत्र
सबसे अच्छी बातें (भाग 1, 2, 3)
सर्वोदयी नैतिक धर्म
स्वप्न विचार
प्रस्तुत ग्रंथ "स्वप्न विचार" प्रत्येक प्राणी के लिए उपयोगी है, जिसमें रात्रि के विभिन्न प्रहर में आए स्वप्नों के अच्छे व बुरे फल को बताया गया है। प्रस्तुत ग्रंथ में सरल भाषा में स्वप्नों के फल का वर्णन किया गया है। भाषा सर्वग्राही है। प्रस्तुत ग्रंथ में भद्रबाहु संहिता में वर्णित स्वप्नों को बिना परिवर्तन के ज्यों का त्यों ही दिया है। किस- किस तिथि के स्वप्न निरर्थक और किस तिथि के स्वप्न फलदाई, मिथ्या व असत्य होते हैं इत्यादि का वर्णन किया गया है।
हमारे आदर्श
"हमारे आदर्श" कृति आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज द्वारा रचित है। इस पुस्तक में बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य , मृत प्राय मुनि परम्परा को जीवंतता प्रदान करने वाले, देश भर में विहार कर श्रमण संस्कृति का संरक्षण व संवर्धन करने वाले परम पूज्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्ति सागर जी महाराज का अलौकिक जीवन वृत्त अंकित है।
