28 ग्रंथ
अभिनव सिद्धचक्र मंत्रार्चना
प्रस्तुत कृति "अभिनव सिद्धचक्र मंत्रार्चना " आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा रचित अभिनव सिद्धचक्र महार्चना से संकलित मंत्रावली है। समयाभाव के कारण जो भक्तजन 8 दिन का सिद्धचक्र विधान रचकर अर्चना नहीं कर पाते अथवा जिनका प्रतिदिन सिद्धों की आराधना का नियम है उन श्रद्धालुओं के आग्रह पर इस कृति की रचना हुई। इस कृति के माध्यम से अनेक श्रमण व श्रावकों ने अपने जीवन में 1008 , 500 अथवा 108 विधानों को करने का संकल्प लिया एवं प्रतिदिन विधान के माध्यम से सिद्धों की अर्चना कर पुण्य का संचय कर रहे हैं।
कलिकुण्ड पार्श्वनाथ विधान
परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज ने भगवान् श्री पार्श्वनाथ की पूजा और विशिष्ट अर्घों के साथ 4 वलयों के द्वारा यह विधान लिखा है। कलिकुंड का अर्थ सर्वकलेश, कलह समूह का नाश करने वाला है। प्रस्तुत पुस्तक भव्य जीवों के चित्त को आह्लादित और विशुद्ध करने का मंगलमय साधन है।
कल्याण मंदिर विधान
चौसठऋद्धि विधान
णमोकार महार्चना
दुःखों से मुक्ति (बृहत् सहस्रनाम महार्चना)
यागमंडल विधान
प्रस्तुत कृति "यागमंडल विधान एवं पंचकल्याणक पूजा" में परम पूज्य आचार्य श्री वसुनन्दी जी मुनिराज की लेखनी से प्रसूत भक्ति से समन्वित अद्भुत रचना है। पंचकल्याणक प्रतिष्ठा, वेदी प्रतिष्ठा, कलशारोहण, दीक्षा आदि कार्यों में इस विधान को ही संपन्न किया जाता है। इस विधान में शब्दों का निर्माण, छंद आदि लयबद्ध तरीके से सरल, सहज अर्थपूर्ण ढंग से किया गया है, जिसे पढ़कर भव्य प्राणी सहज भक्ति सागर में सराबोर हो जाते हैं। सभी सातिशय पुण्यार्जन करें इसी अभिलाषा से प्रस्तुत कृति का प्रकाशन किया गया है।
लघु नंदीश्वर विधान
श्री चंद्रप्रभ विधान
परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा रचित प्रस्तुत "चन्द्रप्रभ विधान" श्रद्धा शिरोमणि श्री चन्द्रप्रभ भगवान के मूलगुणों की स्तुति हेतु रचा गया है। इस विधान में कुल 128 अर्घ्य हैं। प्रस्तुत कृति भव्य श्रावकों के सर्व मनोरथों को पूर्ण करने वाली है, भव दुःखों का अंत करने में समर्थ है। इस विधान में 8 वलय हैं, जिसमें पांच कल्याणकों के, सोलह स्वप्नों के फलों के, चौंतीस अतिशयों के, मुनिराज के 28 मूलगुणों के, बारह तप, दस धर्म व तीन गुप्तियों के, अष्ट प्रातिहार्य, अनंत चतुष्टय के व सिद्धों के अष्ट मूलगुणों के अर्घ हैं। यह विधान श्रावकों के लिए विधेय है।
श्री चंद्रप्रभ विधान (देहरा तिजारा)
श्री चौबीसी महार्चना
श्री जम्बूस्वामी विधान
श्री नंदीश्वर विधान
श्री नेमिनाथ विधान
श्री पंचमेरू विधान
श्री पद्मप्रभ विधान
श्री पुष्पदंत विधान
श्री भक्तामर विधान
