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28 ग्रंथ
श्री समवशरण महार्चना
श्री सम्मेदशिखर विधान
श्री सर्वतोभद्र महार्चना
इस भक्ति के महोदधि स्वरूप "सर्वतोभद्र महार्चना" की रचना आचार्य श्री वसुनन्दी जी मुनिराज द्वारा केवल 15 दिन में चातुर्मास के दौरान तारंगा जी सिद्ध क्षेत्र में की गई। 92 छंदों में निबद्ध इस महार्चना में 84 पूजा, 1902 अर्घ्य और 86 पूर्ण अर्घ्य हैं। विधान में 3 लोक के समस्त चैत्य, चैत्यालयों की भक्ति के साथ इसमें सिद्धांत भी दृष्टिगोचर होता है।यह विधान बहुत चमत्कारी है। इसे विशेष पर्व, दिन आदि में करना ही चाहिए।
