403 ग्रंथ
रामचरित्र (भाग 1-2) (आ. श्री सोमदेव स्वामी)
रुम्मिणी-चरियं (रुक्मिणी चरित्र)
रोहिणी व्रत कथा
रोहिणी व्रत कथा
लक्खण-गंथो (लक्षण-ग्रंथ)
लक्खमणा-चरियं (लक्ष्मणा चरित्र)
लघु नंदीश्वर विधान
लेस्सा-सारो (लेश्या सार)
वय-कहा-कोसो (व्रत कथा कोश)
वयण-पमाणत्तं (वचन प्रमाणत्व)
नय प्रमाणादि के द्वारा ही वस्तु तत्व का सम्यक् अवबोध संभव है। इन्हीं नयादि के द्वारा परीक्षण कर तत्वों का ग्रहण करना चाहिए। आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज द्वारा रचित प्रस्तुत 543 गाथाओं में निबद्ध "वयण-पमाणत्तं" नामक ग्रंथ न्याय रूपी दुर्ग में प्रवेश हेतु तोरणद्वार ही है। द्रव्य के लक्षण, गुण, पर्याय, स्वभाव, प्रमाण, नयादि का विवेचन करने वाला यह ग्रन्थ पठनीय व स्मरणीय है।
वरांग चरित्र (आ. श्री जटासिंह नंदी)
वसु विचार
वसु सुबंध (महाकाव्य) (प्रो. डॉ. उदयचंद्र जी जैन)
वसुऋद्धि
आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा संकलित एवं संपादित इस लघु काय कृति "वसुऋद्धि" में आचार्य श्री शिवकोटी जी मुनिराज द्वारा रचित 'रत्नमाला', आचार्य श्री पूज्यपाद स्वामी जी द्वारा रचित 'पूज्यपाद श्रावकाचार' व 'इष्टोपदेश', आचार्य श्री योगिन्दु देव जी द्वारा रचित 'ज्ञानांकुश', आचार्य श्री विशाल कीर्ति जी द्वारा रचित 'वैराग्यमणिमाला', आचार्य श्री अकलंक देव जी द्वारा रचित 'स्वरूप संबोधन', आचार्य श्री नेमिचन्द जी सूरि जी द्वारा रचित 'लघु द्रव्य संग्रह' तथा श्री प्रभाचंद्राचार्य जी द्वारा रचित 'अर्हत प्रवचनम्' अर्थ सहित समाहित हैं। कुछ उपलब्ध कुछ अनुपलब्ध दुर्लभ कृतियों का समावेश इस कृति की महत्ता को बढ़ाता है।
