403 ग्रंथ
सुलोचना चरित्र
सुशीला उपन्यास (पं. गोपालदास वरैया)
गोपाल दास बरैया द्वारा रचित प्रस्तुत "सुशीला उपन्यास" समाज में विद्यमान बुराईयों का विध्वंसक, धार्मिक भावनाओं का संप्रेरक, नीति-रीति का पक्षधर, पाप भीरुता और वैराग्य का संपोषक है। यह विश्व का एक ऐसा उपन्यास है जिसमें जैन दर्शन में निहित कर्म सिद्धांत चर्चा, गुणस्थान कथन और क्षपक एवम् उपशम श्रेणी के आरोहक योगियों के परिणामों के बारे में अपूर्वकरण, अनिवृत्तिकरण का दृष्टांतों के द्वारा अत्यंत सरल शब्दों में विवेचन किया है। भाषा सरल और बोधगम्य है।
सुसीमा-चरियं (सुसीमा चरित्र)
सूदग-पादग-णिण्णय-विही (सूतक-पातक निर्णय विधि)
स्तुति प्रतिक्रमण
स्मृति पटल से भाग-2
प्रस्तुत कृति "स्मृति पटल से भाग-2" में परम पूज्य आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी मुनिराज के कुछ संस्मरण उल्लिखित हैं। जिनके माध्यम से गुरु के विषय में और अधिक जानने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इन प्रसंगों से जीवन में नवीन अनुभव और प्रेरणा भी प्राप्त होती है। इसे पढ़कर व्यक्ति अपने जीवन की दिशा व दशा समीचीन कर सकते हैं।
स्मृति पटल से, भाग 1-2 (आ. श्री वर्धस्वनंदिनी)
प्रस्तुत कृति "स्मृति पटल से भाग-1" में परम पूज्य आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी मुनिराज के जीवन के कुछ प्रसंगों को, संस्मरणों को लिपिबद्ध किया गया है,जो कि विशुद्धि व वैराग्य का संवर्धन करने वाले हैं। चेतना में विश्वास और धर्म में स्थिरता प्रदान करने वाले हैं। इन्हें पढ़कर बहुत आनंद उत्पन्न होता है क्योंकि ये बहुत रोचक व प्रेरक हैं।
स्वप्न विचार
प्रस्तुत ग्रंथ "स्वप्न विचार" प्रत्येक प्राणी के लिए उपयोगी है, जिसमें रात्रि के विभिन्न प्रहर में आए स्वप्नों के अच्छे व बुरे फल को बताया गया है। प्रस्तुत ग्रंथ में सरल भाषा में स्वप्नों के फल का वर्णन किया गया है। भाषा सर्वग्राही है। प्रस्तुत ग्रंथ में भद्रबाहु संहिता में वर्णित स्वप्नों को बिना परिवर्तन के ज्यों का त्यों ही दिया है। किस- किस तिथि के स्वप्न निरर्थक और किस तिथि के स्वप्न फलदाई, मिथ्या व असत्य होते हैं इत्यादि का वर्णन किया गया है।
स्वर्ण जन्मजयंती महोत्सव (ऐलक विज्ञान सागर)
परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के 50वें जन्मोत्सव पर प्रकाशित प्रस्तुत कृति "स्वर्ण जन्म जयंती महोत्सव" में विभिन्न कवियों आदि के उद्गार मुक्तक, कविता वा भजन रूप में प्रस्तुत हैं। जिसका संपूर्ण संकलन ऐलक श्री विज्ञान सागर जी महाराज द्वारा किया गया है।
स्वाती की बूँद
स्वात्मोपलब्धि (समाधि तंत्र)
प्रस्तुत ग्रंथ "स्वात्मोपलब्धि" आचार्य भगवन् श्री पूज्यपाद स्वामी द्वारा रचित समाधितंत्र पर परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य गुरुवर श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा 2017 में ग्रीन पार्क दिल्ली में चातुर्मास के दौरान ली गई अनुपम वाचना है। इसमें अध्यात्म रस का प्रवाह करने वाले 105 श्लोक हैं। शुद्धात्मा के स्वरूप का प्रतिपादन करने वाला यह चिंतन की विधि का अनूठा ग्रंथ है। आध्यात्मिकता क्या है? अध्यात्म विज्ञान, भेद विज्ञान क्या है? वह कैसे प्राप्त हो? इत्यादि को समझने के लिए हमारी दृष्टि में यह सर्वोत्कृष्ट ग्रंथ है।
स्वास्थ्य बोधामृत
हनुमान चरित्र
प्रस्तुत ग्रंथ "हनुमान चरित्र" मोक्षगामी कामदेव श्री हनुमान जी पर आधारित है। उनके जीवन काल पर चित्रित समस्त उतार-चढ़ाव को दर्शाता है, जिसके पठन- पाठन से जीवन में वैराग्य, समता और सेवा भाव जागृत होता है। कविवर ब्रह्यराय जी द्वारा रचित ये ग्रंथ आबाल वृद्ध सभी आत्म-कल्याणेच्छुओं के लिए स्वाध्याय करने योग्य, सरल और सुगम भाषा में लिपिबद्ध है। मोक्षगामी महापुरुष श्री हनुमान जी के संबंध में लोगों में फैली हुई कपोल कल्पनाओं को दूर करने के लिए उनका यथार्थ एवम् सत्य रूप जीवन चरित्र वर्णित है।
हमारे आदर्श
"हमारे आदर्श" कृति आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज द्वारा रचित है। इस पुस्तक में बीसवीं सदी के प्रथमाचार्य , मृत प्राय मुनि परम्परा को जीवंतता प्रदान करने वाले, देश भर में विहार कर श्रमण संस्कृति का संरक्षण व संवर्धन करने वाले परम पूज्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्ति सागर जी महाराज का अलौकिक जीवन वृत्त अंकित है।
हस्ताक्षर (ऐलक विज्ञान सागर)
प्रस्तुत कृति "हस्ताक्षर" में कविताओं का संकलन है। ऐलक श्री विज्ञान सागर जी महाराज ने परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के 50वें जन्मोत्सव पर उनके गुणानुराग से निज भक्ति व श्रद्धा से ओतप्रोत जिन कविताओं की रचना की वे सचमुच अत्यंत अनुपम हैं, पठनीय व आनंददायक हैं।
