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साहित्य

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403 ग्रंथ

सम्मत्त-सारो (सम्यक्त्व सार)

सम्मत्त-सारो (सम्यक्त्व सार)

Prakrit
सम्मेदसिहर-महप्पुरो (सम्मेद शिखर माहात्म्य)

सम्मेदसिहर-महप्पुरो (सम्मेद शिखर माहात्म्य)

Prakrit
सम्यक्त्व कौमुदी

सम्यक्त्व कौमुदी

Hindi

प्रस्तुत ग्रंथ "सम्यक्त्व कौमुदी" में विभिन्न कहानियों के माध्यम से सम्यग्दर्शन के महत्व को दर्शाते हुए उसे प्राप्त करने की प्रेरणा दी है। भव सागर से पार होने के इच्छुक जीवों के लिए इस ग्रंथ में ग्रंथकार ने सम्यक्त्व उत्पत्ति की 8 कथाओं का जिस रोचक शैली से वर्णन किया है वैसा वर्णन अन्यत्र उपलब्ध नहीं है।

सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की शौर्य गाथा

सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य की शौर्य गाथा

Hindi
सर्वतोभद्र विधान

सर्वतोभद्र विधान

Hindi
सर्वोदयी नैतिक धर्म

सर्वोदयी नैतिक धर्म

Hindi
साप्ताहिक विधान

साप्ताहिक विधान

Hindi
सामुद्दिग-सत्थं (सामुद्रिक शास्त्र)

सामुद्दिग-सत्थं (सामुद्रिक शास्त्र)

Prakrit
सार समुच्चय (आ. श्री कुलभद्र स्वामी जी)

सार समुच्चय (आ. श्री कुलभद्र स्वामी जी)

Sanskrit
सिद्धचक्र विधान

सिद्धचक्र विधान

Hindi
सिन्दूर प्रकरण (आ. श्री सोमदेव स्वामी जी)

सिन्दूर प्रकरण (आ. श्री सोमदेव स्वामी जी)

Sanskrit
सिरि-सीयलणाह-चरियं (श्री शीतलनाथ चरित्र)

सिरि-सीयलणाह-चरियं (श्री शीतलनाथ चरित्र)

Prakrit

प्रस्तुत ग्रन्थ " श्री शीतलनाथ चरित्र" आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज द्वारा रचित प्राकृत महाकाव्य है। महापुरुषों का जीवन चरित्र पढ़ने से नैतिक मूल्यों का संवर्द्धन, संस्कारों व सभ्यता का बीजारोपण, हित-अहित परिज्ञान , परिवार, समाज, राष्ट्र व देश के प्रति कर्तव्यों का ज्ञान, क्षमादि गुणों का विकास होता है। महाकाव्य की विधा में लिखित विभिन्न अलंकार, रस व छंदों से युक्त इस ग्रंथ में दसवें तीर्थंकर श्री शीतलनाथ भगवान् का चरित्र निश्चय ही प्रेरणादायक, दोषहारक व पुण्यकारक है।

सिवमग्गो (शिवमार्ग)

सिवमग्गो (शिवमार्ग)

Prakrit
सीता चरित्र (श्री दयाचंद गोलीय)

सीता चरित्र (श्री दयाचंद गोलीय)

Hindi
सीप का मोती (महावीर जयंती)

सीप का मोती (महावीर जयंती)

Hindi
सुकुमाल चरित्र (आ. श्री सकलकीर्ति जी)

सुकुमाल चरित्र (आ. श्री सकलकीर्ति जी)

Hindi

आचार्य श्री सकलकीर्ति जी द्वारा रचित "सुकुमाल चरित्र" नामक प्रशस्त ग्रंथ का संपादन आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा किया गया है। जो उपसर्ग विजेता मुनि सुकुमाल के चरित्र पर आधारित है। उनके गृहस्थ जीवन में पालन पोषण, राज्य और वैराग्योपरांत तपस्या एवं उपसर्ग का बड़े सुंदर और रोचक रूप से दर्शन है। प्रस्तुत कृति अज्ञान से तमोवृत भवारण्य में पथ भ्रष्ट हो, संसार में भटकते हुए भव्य प्राणियों के लिए सद्ज्ञान रश्मि के समान है। यह मुनि निंदा जैसे जघन्यतम अपराधों से मुक्ति दिलाने वाला और धर्म का अचिन्त्य महात्म्य प्रकाश करने वाला शास्त्र है।

सुख का सागर (चौबीसी चालीसा)

सुख का सागर (चौबीसी चालीसा)

Hindi
सुदर्शन चरित्र (आ. विद्यानंदि मुनि)

सुदर्शन चरित्र (आ. विद्यानंदि मुनि)

Hindi

प्रस्तुत ग्रंथ "सुदर्शन चरित्र" सेठ सुदर्शन को आधार बनाकर लिखा गया है। जिसमें उनकी णमोकार मंत्र पर दृढ़ श्रद्धा, मुनिराज की एक रात्रि में की गई वैय्यावृत्ति का फल व उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं को लिपिबद्ध किया है। इस ग्रंथ की रचना भट्टारक श्री विद्यानंदी जी के द्वारा लगभग सन् 1593 में गंधारपुरी (सूरत) में स्थित जैन मंदिर में की गई थी। ग्रंथ का संपादन आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा किया गया है। नोट-इस ग्रंथ की सरल भाषा अल्पज्ञ व्यक्तियों के लिए भी रोचक शैली है जिससे स्वाध्यायार्थी आद्योपांत पढें बिना इस ग्रंथ को नहीं छोड़ता।

सुद्धप्प-थुदी (शुद्धात्म स्तुति)

सुद्धप्प-थुदी (शुद्धात्म स्तुति)

Prakrit
सुद्धप्पा (शुद्धात्मा)

सुद्धप्पा (शुद्धात्मा)

Prakrit

परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा लिखित प्रस्तुत प्राकृत ग्रंथ "सुद्धप्पा" (शुद्धात्मा) 174 श्लोकों में निबद्ध है। यह एक गूढ़ आध्यात्मिक ग्रंथ है। इसका प्रत्येक कार्य मानों भेदविज्ञान का सूत्र है। आध्यात्मिक सरोवर में अवगाहन करने हेतु इस ग्रंथ को अवश्य पढ़ना चाहिए।

सुबोहण्णवो (सुबोधार्णव)

सुबोहण्णवो (सुबोधार्णव)

Prakrit
सुभाषित रत्न संदोह (आ. श्री अमितगतिस्वामी जी)

सुभाषित रत्न संदोह (आ. श्री अमितगतिस्वामी जी)

Sanskrit
सुभौम चक्रवर्ती चरित्र

सुभौम चक्रवर्ती चरित्र

Hindi

आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा संपादित प्रस्तुत ग्रंथ 9वें चक्रवर्ती सुभौम के जीवन चरित्र पर आधारित है। महामंत्र णमोकार के अनादर के फल, विषयों में आसक्त होने का परिणाम, पुण्य-पाप का प्रत्यक्ष फल बताने वाला सरल और पापों से भयभीत कर धर्म की प्रेरणा देने का प्रबल निमित्त है। भट्टारक रत्नचंद जी द्वारा रचित इस ग्रंथ में सुभौम चक्रवर्ती के भवों का वर्णन 7 सर्गों और 822 आर्या छंदों के निमित्त से बड़े ही मनोहर वचनों में किया गया है।

सुरसुंदरी चरित्र

सुरसुंदरी चरित्र

Hindi