णमो अरिहंताणं · णमो सिद्धाणं · णमो आइरियाणं · णमो उवज्झायाणं · णमो लोए सव्वसाहूणं
निर्ग्रन्थ ग्रंथमालासमिति (पंजीकृत) निवेदन करें

साहित्य

ग्रंथ, प्रवचन, काव्य एवं टीका — पूर्णतः निःशुल्क

403 ग्रंथ

जिन श्रमण भारती (संकलन — भक्ति, स्तुति, ग्रंथादि)

जिन श्रमण भारती (संकलन — भक्ति, स्तुति, ग्रंथादि)

Sanskrit
जिन सहस्रनाम स्तोत्र

जिन सहस्रनाम स्तोत्र

Sanskrit
जिन सिद्धांत महोदधि

जिन सिद्धांत महोदधि

Hindi
जिनकल्पि सूत्र (श्री प्रभाचंद्राचार्य)

जिनकल्पि सूत्र (श्री प्रभाचंद्राचार्य)

Sanskrit
जिनदत्त चरित्र (कविवर ब्रह्मराय)

जिनदत्त चरित्र (कविवर ब्रह्मराय)

Hindi

श्री गुणभद्राचार्य जी द्वारा रचित "जिनदत्त चरित्र" नामक यह ग्रंथ अरिहंत मत का अवलंबन लेने वाले जिनदत्त स्वामी के चरित्र का वर्णन करने वाला श्रेष्ठ ग्रंथ है, जो भव्य जीवन को मोक्षमार्ग की प्रेरणा देने वाला, संसार- शरीर-भोगों के यथार्थ स्वरूप का दिग्दर्शन कराने वाला है।

जीवन का सहारा

जीवन का सहारा

Hindi
जोदिस-सत्थं (ज्योतिष-शास्त्र)

जोदिस-सत्थं (ज्योतिष-शास्त्र)

Prakrit
ज्ञानवर्धक अर्चना (श्रुत स्कंध विधान)

ज्ञानवर्धक अर्चना (श्रुत स्कंध विधान)

Hindi
ज्ञानांकुश (तत्त्वचिंतन के सूत्र)

ज्ञानांकुश (तत्त्वचिंतन के सूत्र)

Hindi

आचार्य भगवन "योगिन्द्र देव" द्वारा रचित ज्ञानंकुश (तत्व चिंतन के सूत्र) नामक इस ग्रंथ में परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी, प्राकृत भाषा चक्रवर्ती आचार्य श्री "वसुनंदी जी" मुनिराज ने शब्दों की सरलता व भाव गाम्भीर्य पूर्वक जो प्रवचन दिए; यह ग्रंथ उन्हीं का संकलन है। ध्यान के विषय में समझने के इच्छुक पाठकों के लिए यह ग्रंथ अत्यंत सहायक सिद्ध होगा।

झाणसारो (ध्यानसार)

झाणसारो (ध्यानसार)

Prakrit

प्रस्तुत प्राकृत ग्रंथ "झाण - सारो" ध्यान सार परम पूज्य प्राकृत भाषा चक्रवर्ती आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज द्वारा 111 गाथाओं में लिखा गया है। ध्यान के स्वरूप, भेद व उनसे होने वाले लाभ का वर्णन इस ग्रंथ के अंतर्गत किया गया है। ध्यान का प्रतिपादन करने वाला यह अद्भुत ग्रंथ है।

ठहरो! ऐसे चलो

ठहरो! ऐसे चलो

Hindi

प्रस्तुत कृति "ठहरो! ऐसे चलो" आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के उन प्रवचनों का संकलन है जिसके माध्यम से पूज्य गुरुदेव ने लोगों का सम्यक् मार्ग दर्शन किया। मंजिल की ओर बढ़ना भी एक कला है, इस कला को प्रस्‍तुत कृति के माध्यम से जानने और सीखने का प्रयास कर अपनी मंजिल को पाना कठिन नहीं होगा। पूज्य श्री के ये प्रवचन भटके हुए व्यक्ति को राह की भटकन से हटाकर अपनी मंजिल की ओर प्रेरित करने के लिए संजीवनी के समान हैं।

डॉक्टरों से मुक्ति

डॉक्टरों से मुक्ति

Hindi
णंदिणंद-सुत्तं (नंदीनंद सूत्र)

णंदिणंद-सुत्तं (नंदीनंद सूत्र)

Prakrit
णमोकार का महत्त्व

णमोकार का महत्त्व

Hindi
णमोकार महार्चना

णमोकार महार्चना

Hindi
णमोथार-महप्पुरो (णमोकार माहात्म्य)

णमोथार-महप्पुरो (णमोकार माहात्म्य)

Prakrit

आचार्य श्री वसुनन्दी जी मुनिराज द्वारा रचित प्रस्तुत प्राकृत ग्रंथ "णमोयार-महप्पुरो" (णमोकार महात्म्य) 159 गाथाओं में निबद्ध है। द्वादशांग के सारभूत जिस मंत्र का एक बार स्मरण जीव को शुभायु, शुभ गति की ओर प्रेरित कर देता है, जिसमें विश्व की समस्त शक्तियों का निवास है, जो असाध्य को साध्य करने की सामर्थ्य से युक्त है, उस महामंत्र की शक्ति, प्रभाव और मंत्र के महात्म्य आदि को दर्शाने वाला यह ग्रंथ अनुपमेय है।

णाण-सारो (ज्ञान सार)

णाण-सारो (ज्ञान सार)

Prakrit
णाणवड्डिणी (ज्ञानवर्द्धिनी)

णाणवड्डिणी (ज्ञानवर्द्धिनी)

Prakrit
णिग्गंथ-थुदी (निर्ग्रन्थ स्तुति)

णिग्गंथ-थुदी (निर्ग्रन्थ स्तुति)

Prakrit
णीदि-सारो (नीति सार)

णीदि-सारो (नीति सार)

Prakrit
तच्चसारो (तत्त्व सार)

तच्चसारो (तत्त्व सार)

Prakrit

परम पूज्य आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी महाराज द्वारा रचित प्रस्तुत "तच्च-सारो"(तत्वसार)ऐसी जीवन रचना दिखलाने वाला मानचित्र है जिसके द्वारा हम स्वयं के आदर्शों को पा सकें, आंतरिक आचार संगठन को सुदृढ़ बना सकें व धर्ममय जीवन व्यतीत करके नैष्कर्म अवस्था को प्राप्त कर सकें।

तच्चसिद्धी (तत्त्वसिद्धि) — तत्त्वार्थ सूत्र की प्राकृत टीका

तच्चसिद्धी (तत्त्वसिद्धि) — तत्त्वार्थ सूत्र की प्राकृत टीका

Prakrit
तच्चा-वियारो सारो (आ. श्री वसुनंदी जी)

तच्चा-वियारो सारो (आ. श्री वसुनंदी जी)

Sanskrit

प्रस्तुत ग्रंथ "तच्च वियारो सारो" में 295 गाथाओं के माध्यम से णमोकार महात्म्य ,धर्म, सम्यक्त्व आदि के फल को बताया गया है। काव्य सरल व परोपकार की भावना से युक्त हैं। प्रस्तुत कृति प्राचीन आचार्य श्री वसुनंदी जी की अनमोल व अनुपम कृति है। जिसका सरल व बोधप्रद अन्वयार्थ सभी भव्य जीवों के लिए ज्ञान वृद्धि व आत्मरसामृत के पान कराने में पूर्ण सक्षम है। जिसका स्वाध्याय सभी के करने योग्य है।

तत्त्व-भावना (आ. श्री अमितगति जी)

तत्त्व-भावना (आ. श्री अमितगति जी)

Sanskrit

प्रस्तुत ग्रंथ "तत्व भावना" आचार्य श्री अमितगति स्वामी द्वारा 120 काव्यों में लिखा गया है। भेद विज्ञान मूलक इस ग्रंथ का सम्पादन आचार्य श्री वसुनन्दी जी मुनिराज द्वारा किया गया है।