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साहित्य

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403 ग्रंथ

तत्त्वज्ञान तरंगिणी (श्री मद्भट्टारक ज्ञानभूषण जी)

तत्त्वज्ञान तरंगिणी (श्री मद्भट्टारक ज्ञानभूषण जी)

Sanskrit
तत्त्वार्थ सार (श्री मद्मृतचन्द्राचार्य सूरि)

तत्त्वार्थ सार (श्री मद्मृतचन्द्राचार्य सूरि)

Sanskrit
तत्त्वार्थ सूत्र (आ. श्री उमास्वामी जी)

तत्त्वार्थ सूत्र (आ. श्री उमास्वामी जी)

Sanskrit
तत्त्वार्थस्य संसिद्धि

तत्त्वार्थस्य संसिद्धि

Sanskrit
तत्त्वोपदेश (छहढाला) (पं. प्रवर दौलतराम जी)

तत्त्वोपदेश (छहढाला) (पं. प्रवर दौलतराम जी)

Hindi
तत्वार्थ सूत्र विधान

तत्वार्थ सूत्र विधान

Hindi

आचार्य भगवन् श्री उमास्वामी द्वारा रचित प्रस्तुत ग्रंथ 357 सूत्रों से युक्त है, जिसके माध्यम से रचनाकार ने चारों अनुयोगों का समावेश कुल 10 अध्यायों में किया। सूत्रों का हिंदी अर्थ परम पूज्य भारत गौरव आचार्य श्री देशभूषण जी मुनिराज द्वारा सरल व ज्ञानवर्द्धक रूप से है। तत्त्वार्थ सूत्र जैन दर्शन का एक ऐसा प्रतिनिधि स्वरूप मूल ग्रंथ है जिसका गुरुमुख से अध्ययन करने पर जैन धर्म की आत्मा से साक्षात्कार हो जाता है।

तव-सारो (तप सार)

तव-सारो (तप सार)

Prakrit

'तप सारो' नामक यह प्राकृत ग्रंथ आचार्य श्री वसुनंदी जी गुरुदेव द्वारा रचित है जो 111 गाथाओं में निबद्ध है। इसमें तप की आवश्यकता, महत्ता, स्वरूप व भेदादि का सुंदर वर्णन है। तप को जानने व समझने के लिए यह ग्रंथ अवश्य पठनीय है।

तित्थयर-णामत्थुदी (तीर्थंकर नाम स्तुति)

तित्थयर-णामत्थुदी (तीर्थंकर नाम स्तुति)

Prakrit

जो श्रद्धा और विश्वास के युगल नेत्रों से भगवान् की शरण ग्रहण करता है उसे निश्चय ही परम कृतार्थता प्राप्त होती है। परमात्मा का नाम स्मरण मात्र ही सहस्त्रों पापों का क्षय करने में समर्थ है। वास्तव में जिनस्तुति पुण्य प्रसाधक परिणामों की कामधेनु है। परम पूज्य आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी महाराज द्वारा रचित प्रस्तुत प्राकृत ग्रंथ"तित्थयर- णामत्थुदी (तीर्थंकर नाम स्तुति) में तीस चौबीसी अर्थात् 720 जिनेंद्रों की नामस्तुति की गई है। तन्मयतापूर्वक इसका पाठ एक क्षण में भव-भव के वरदान प्राप्ति का कारण हो सकता है।

तियालवत्ती चरियं (त्रिकालवर्ती चरित्र)

तियालवत्ती चरियं (त्रिकालवर्ती चरित्र)

Prakrit
तीनलोक विधान

तीनलोक विधान

Hindi
तीर्थंकर प्रेरणा (सोलह कारण विधान)

तीर्थंकर प्रेरणा (सोलह कारण विधान)

Hindi
तैयारी जीत की

तैयारी जीत की

Hindi

प्रस्तुत कृति "तैयारी जीत की" एक प्रवचन शैली के रूप में प्रस्तुत है, जिसके माध्यम से दुखों में, संकटों में, पाप के उदय में कैसे अपने आप को संभालें, कैसे उनसे जीते इसकी प्रेरणा, जीवन में ओज और हारे हुए में जोश भरने का दायित्व अच्छी तरह से निहित है। पॉजिटिव थिंकिंग व पुरुषार्थ पर जोर देते हुए छोटे-छोटे दृष्टांत, मुक्तक, दोहे व अंग्रेजी सूक्तियों के माध्यम से अनुत्साही, निष्फल, असफलता को प्राप्त बंधुओं को नई दिशा व मार्ग प्रकाशित किया है। आप भी तैयारी जीत की कर लीजिए।

त्रय विधान

त्रय विधान

Hindi
त्रिवेणी (संग्रह ग्रंथ)

त्रिवेणी (संग्रह ग्रंथ)

Hindi
दंसण-परिक्खा (दर्शन परीक्षा)

दंसण-परिक्खा (दर्शन परीक्षा)

Prakrit

परम पूज्य प्राकृतभाषा चक्रवर्ती, अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा ‌प्राकृत भाषा में रचित "दर्शन-परीक्षा" नामक यह एक अभूतपूर्व ग्रंथ है; जिसमें प्राकृत भाषा की १०४४ गाथाएं हैं। यह ग्रंथ षट्दर्शन का विवेचन करता है। इनके प्रमाण, तत्त्व और मीमांसा का निरूपण करता है और जैन दृष्टि से इन सबका युक्तिसंगत खंडन करता है एवं जैनदर्शन के अनुसार सबकी समीक्षा करता है।

दशलक्षण महार्चना

दशलक्षण महार्चना

Hindi

मुनि श्री प्रज्ञानंद जी महाराज द्वारा लिखित "दशलक्षण महार्चना" सबसे अधिक किये जाने वाले इस विधान में सामूहिक पूजन, सभी धर्म के अलग-अलग अर्घ्य, 10 पूजा और सभी पूजा में 12 अर्घ्य हैं। यह विधान भावों की निर्मलता और पुण्यार्जन का हेतु है।

दशलक्षण विधान

दशलक्षण विधान

Hindi
दशामृत

दशामृत

Hindi

प्रस्तुत ग्रंथ "दशामृत" आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा दस धर्म पर प्रदत्त कल्याणकारी प्रवचनों का संकलन है, जिसमें सरल और उचित उदाहरणों से दस लक्षण धर्म को गंभीरता से समझाया है। उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव आदि विषयों को न केवल विभिन्न उदाहरणों से समझाया है अपितु आचार्य प्रणीत शास्त्रों के प्रमाणिक श्लोक, गाथा आदि से अपनी बात पुष्ट भी की है। प्रवचनों को बहुत सरल, सारगर्भित, रोचक और स्पष्टीकरण के साथ प्रस्तुत किया है। नोट-ये ग्रंथ विद्वानों के साथ-साथ सामान्य श्रावकों के लिए भी उपयोगी है।

दाण-सारो (दान सार)

दाण-सारो (दान सार)

Prakrit

परम पूज्य प्राकृतभाषा चक्रवर्ती ,अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी "आचार्य श्री वसुनंदी जी" मुनिराज द्वारा रचित प्रस्तुत "दान-सारो" ग्रंथ २२८ गाथाओं में निबद्ध है। इस ग्रंथ के अंतर्गत आचार्यश्री ने दान के स्वरूप, लक्षण, भेद, दाता के गुण, भूषण, दूषण, नवधाभक्ति, शुद्धि इत्यादि के विस्तृत वर्णन द्वारा वर्तमान पीढी को दान की महिमा बताकर उन्हें उनके धर्म में स्थायित्व प्रदान किया है।

दान के अचिन्त्य प्रभाव

दान के अचिन्त्य प्रभाव

Hindi

प्रस्तुत ग्रंथ "दान का अचिन्त्य प्रभाव" में 4 प्रकार के दानों के प्रभाव, फल और अवसर का विशेष रूप से वर्णन करते हुए विभिन्न कहानियां एवं उदाहरणों के माध्यम से दान का महत्व बतलाया गया है। दाता अपने मुख्य कर्तव्यों को जाने, समझे, प्रवृत्ति करे इस हेतु यहां दान के प्रभाव दर्शाने वाली कहानियों से युक्त कृति का सृजन किया है। भव्य जीव इसके माध्यम से अपने आहार आदि दान के कर्तव्यों में विशेष प्रवृत्ति करेंगे, यही इस कृति का उद्देश्य है।

दिव्य लक्ष्य (संकलन — हिंदी पाठ, स्तुति आदि)

दिव्य लक्ष्य (संकलन — हिंदी पाठ, स्तुति आदि)

Hindi
दुःखों से मुक्ति (बृहत् सहस्रनाम महार्चना)

दुःखों से मुक्ति (बृहत् सहस्रनाम महार्चना)

Hindi
दृष्टि दृश्यों के पार (आ. श्री वर्धस्वनंदिनी, वर्चस्वनंदिनी)

दृष्टि दृश्यों के पार (आ. श्री वर्धस्वनंदिनी, वर्चस्वनंदिनी)

Hindi

प्रस्तुत कृति "दृष्टि दृश्यों के पार" आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के जीवन पर आधारित काव्यकृति जन्म से लेकर एलाचार्य पद तक यात्रा कराते हुए, मुख्य- मुख्य बिंदुओं पर नजर कराती है। जहां आज तक भक्तों की दृष्टि नहीं गई उस दृश्य से परे का बोध कराने में समर्थ यह कृति गुरु भक्ति में रचित लघु, काव्य रूप, आनंद युक्त, भक्ति रस से परिपूर्ण, सरल और ज्ञानवर्धक, भाषा में है। नोट- यदि आप भी पूज्य आचार्य श्री के बारे में जानना चाहते हैं तो इस कृति को अवश्य पढ़ें।

देशभूषण कुलभूषण चरित्र

देशभूषण कुलभूषण चरित्र

Hindi