403 ग्रंथ
दैनिक कवच
धन्यकुमार चरित्र (आ. श्री सकलकीर्ति जी)
प्रस्तुत ग्रंथ "धन्य कुमार चरित्र" की रचना आचार्य श्री सकलकीर्ति जी द्वारा समस्त वर्ग को ध्यान में रखते हुए की गई है जिसमें सरल, सहज, हृदयाग्राह्य व सुगम शब्दों का उपयोग करते हुए चरित्रनायक धन्यकुमार के भवों का वर्णन किया है। आहारदान की अनुमोदना करने मात्र से तथा पंच नमस्कार मंत्र और अणुव्रतों को ग्रहण कर अकृतपुण्य स्वर्गाधिकारी हो धन्यकुमार सेठ हुआ।
धम्म-रसायणं (आ. श्री पद्मनंदी स्वामी जी)
प्रस्तुत कृति "धम्म रसायणं" में आत्मा को परमात्मा बनाने की रासायनिक प्रक्रिया बताई है। प्रस्तुत रचना संसार जीवों पर एक स्तुत्य उपकार है तथा इस ग्रंथ का भाषानुवाद आचार्य भरत सागर जी ने किया है। आत्मा की अवस्था कैसे प्राप्त हो इस पर प्रकाश डाला है। प्रस्तुत ग्रन्थ में मूल गाथा उसका अन्वयार्थ और हिंदी अनुवाद सरल व सहज ही दृष्टिगोचर होते हुए प्रत्येक जीव के ज्ञान को विकसित करने के साथ -साथ आत्म शुद्धि के उपाय करने की भावना को जागृत करेगा , अतः इसका स्वाध्याय अवश्य करणीय है।
धम्म-सुत्ति-संगहो (धर्म सूक्ति संग्रह)
धर्म प्रश्नोत्तर (आ. श्री सकलकीर्ति जी)
धर्म बोध संस्कार (भाग 1-4)
आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा रचित प्रस्तुत ग्रंथ 'धर्म बोध संस्कार' एक लघु काय ग्रंथ है किंतु धर्म के स्वरूप, सम्यग्ज्ञान/तत्वज्ञान और धार्मिक संस्कार का कोष है। जो भी पाठक इसका स्वाध्याय-अध्ययन, पठन-पाठन और मनन- चिंतन करेंगे वे निश्चय ही सन्मार्ग को प्राप्त कर आत्मा की निधि को प्राप्त करेंगे। जैन धर्म का परिचायक ज्ञान कराने की भावना से क्रम-क्रम से सीढ़ी चढ़ते हुए कुल 4 भागों में इसे विभक्त किया गया है जिससे स्वाध्यायार्थी अपनी योग्यता और जिज्ञासा के अनुसार अध्ययन का लाभ ले सकें।
धर्म रत्नाकर (श्री जयसेनाचार्य जी)
धर्म संस्कार (भाग 1-2)
बच्चों और युवाओं के लिए धर्म का प्रारंभिक व मूलभूत ज्ञान कराने के लिए प्रश्नोत्तर के रूप में ये किताब आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा लिखी गई है। पुस्तक में 10 अध्याय इस प्रकार हैं:- 1. णमोकार मंत्र 2. अरिहंत परमेष्ठी 3. सिद्ध परमेष्ठी 4. आचार्य परमेष्ठी 5. उपाध्याय परमेष्ठी 6. साधु परमेष्ठी 7. मंगलोत्तम शरण 8. तीर्थंकर 9. जिनेंद्र देव दर्शन विधि 10. जैन श्रावक नोट- प्रत्येक अध्याय में 50 प्रश्न-उत्तर हैं।
धर्मामृत (भाग 1-2) (श्री नयसेनाचार्य जी)
ध्यान-सूत्राणि (श्री माघनंदी सूरी)
नंगानंग कुमार चरित्र (श्रीमान् देवदत्त)
प्रस्तुत ग्रंथ "नंग अनंग कुमार चरित्र" करोड़ों मुनिराजों की साधना एवं सिद्धत्व से पुनीत स्वर्णगिरि/श्रमणगिरि/सोनागिर से मोक्ष पधारे दो भाई नंग और अनंग कुमार के जीवन पर रचित है। इस छोटे से ग्रंथ में भी कविवर ने गागर में सागर की तरह धर्म का मर्म भर दिया है। यह ग्रंथ 16 अध्याय एवं 1114 श्लोकों द्वारा रचकर मार्गशीर्ष सुदी 4, वि.सं. 1845 में पूर्ण हुआ।
नंदीश्वर विधान
नय प्रबोधिनी — आलाप पद्धति (हिंदी)
प्रस्तुत ग्रंथ "नय प्रबोधिनी टीका" श्रीमद्देवसेनाचार्य द्वारा लिखित "आलाप पद्धति" ग्रंथ पर हिन्दी टीका है, जिसे नय- न्यायादि के ज्ञाता परम पूज्य आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी मुनिराज ने लिपिबद्ध किया है। इसे पढ़कर व्यक्ति 'आलाप पद्धति' जैसे ग्रंथ को सरलता से समझ सकता है। इस टीका के माध्यम से सामान्य जन की भी नयादि विषयों में रुचि जाग्रत हो सकती है।
ना मिटना बुरा है न पिटना
प्रस्तुत कृति "न मिटना बुरा है न पिटना" परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के अजमेर में अयोजित दस दिवसीय मीठे प्रवचन श्रंखला के प्रवचनों का प्रकाशित अंक है। जिसमे "जीवंत कौन, सामाजिक एकता, साथी सगा न कोई, पाप बिना अपराधी कैसे" इत्यादि विषयों पर रोचक उदाहरणों सहित उपदेश हैं। नोट-प्रवचनकार के लिए ये एक उपयोगी कृति है।
नागकुमार चरित्र (आ. श्री मल्लिषेण जी)
आचार्य श्री मल्लिषेण जी द्वारा रचित प्रस्तुत ग्रंथ "नाग कुमार चरित्र" अत्यंत प्रेरणादायी, वैराग्य प्रद एवं आनंददायक है। ये मगध देश के राजकुमार श्री नागकुमार के जीवन चरित्र पर आधारित है जिनकी कुल आयु 1000 वर्ष थी। इस ग्रंथ में अत्यंत सरल व रोचक रूप से पाप-पुण्य का विवेचन सबके हित की भावना से किया गया है।
